गुरुवार, सितंबर 08, 2011

ओपरा विन्फ्रे

तुम सहज हो
मुखर हो
वाकपटुता तुममें लाजवाब कर देने वाली है
प्रेजेन्टेवल हो
उन्मुक्त हो
मधुर हो,
तुम्हारे इन स्वभावों के बीजों को पानी देने का काम
एक अद्रश्य शक्ति ने किया है|
ये वो शक्ति है
जिसने
प्रताड़ित
मर्दित
शोषित
वंचित
'ओपेरा विन्फ्रे '
को सूत्रधार बनाया है
एक ऐसी जिंदगी का
जहाँ  उसका बीता हर दर्द वो चीज़ है
जिसकी कीमत
उसके वर्तमान के सुख से ऊर्जित
ज़िन्दगी
से आँकी जाती है|
 
  अभी हाल ही में मैंने  'अहा ज़िन्दगी' के अंक में मेरी पसंदीदा शख्सियतों में से एक ओपेरा विन्फ्रे के बारे में पढ़ा| उनके ज़िन्दगी के अंजान सच को जानकर इस जिंदगी के सार को और गहरे से समझ पा रही हूँ कि 'जिंदगी चलती ही जायेगी'...

4 टिप्‍पणियां:

  1. जो सामने दिखता है वैसा ही हो ज़रुरी नहीं ... न जाने कितने ज़ख्म होते हैं हर एक की ज़िंदगी में लेकिन फिर भी चेहरे पर मुस्कान होती है ... अच्छी प्रस्तुति

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  2. bahut sundar rachna mam,mujhe bhi opera winfrey pasand hain ek do baar unke tv show dekhen hain,is vishwavikhyaat shakhshiyat ki jindagi ke antrim chupe hue pahluon se humko avgat karaane ke liye aapka bahut bahut aabhaar...aapki abika..

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  3. प्रशंसा के लिए बहुत बहुत आभार सुशीला जी ...

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