शनिवार, अक्तूबर 01, 2011

चलो कुछ यूँ कर लें

देखो न
इस बार मैंने कितनी ख़ुशबुएँ बोई हैं लॉन में
तुम भी कभी कभी 
रजनीगंधा के फूल बाज़ार से ले आया करो,
मुझे फिर से
फूलों के प्रिंट की साड़ियाँ सुहाने लगी हैं
तुम भी कभी कभी
 वो कुछ 'ख़ास' ग़ज़लें गुनगुनाया करो,
मैंने अबकी बार 
 घर की दीवारों को समंदर के रंग सा रंगवाया है
तुम भी मेरे साथ
तितलियों के रंग से परदे ,हवाओं सी चादरें,चिड़ियों सी चहचहाती पेंटिग्स सजवाया करो,
तुम भी जानते हो मैं भी
हम अब 'ऑप्टिमिस्टिक'  होना चाहते हैं,
उलझनों की गिरफ़्त
अहसासों की छुअन तक का गला घोंट देती है,
क्यों ना चलो कुछ यूँ कर लें
फिर से पिरोयें
अहसास
कोशिशों के धागे से  

21 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर रचना..
    क्या कहने

    पहली बार आपके ब्लाग पर हूं, वाकई अच्छा लगा।

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  2. चलो कुछ यूँ कर लें...
    खूबसूरत!
    आशीष
    --
    लाईफ़?!?

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  3. कोशिशों के धागे सच ही फ़ूल खिला देंगे ... खूबसूरत रचना

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  4. बहुत ही सुंदर भावाव्यक्ति......

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  5. बहुत सुन्दर भाव हैं, beautiful poem

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  6. डॉ.उर्मिलेश जी की पुत्री के ब्लाग पर आना सुखद अनुभूति है.....
    आपका ब्लॉग बहुत सुंदर है, और कविता भी, बधाई स्वीकारें !

    कृपया मेरे ब्लॉग्स पर भी आएं-
    http://ghazalyatra.blogspot.com/
    http://varshasingh1.blogspot.com/

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  7. बिल्कुल ही अलग अंदाज में रचना निखर उठी है.

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  8. Sounds interesting, might have to take you up on that some other time.
    Following and supporting your blog! Looking forward to future updates!

    India is a land of many festivals, known global for its traditions, rituals, fairs and festivals. A few snaps dont belong to India, there's much more to India than this...!!!.
    Visit for India

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  9. koi baat nahi hum benaami hi sahi but is tarah se bhawnaaon aur ahsaason ki jeewant abhivyakti shaayad hi kabhi dekhi ho...bahut sunder

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  10. आप सभी की सराहना के लिए साधुवाद ....

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  11. बहुत ख़ूबसूरत जज्बातों से सजी पोस्ट.....शानदार|

    संजय भास्कर
    आदत....मुस्कुराने की
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com/

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  12. कल 12/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  13. बहुत नाज़ुक सी, उम्दा कविता..

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  14. कोशिशों की फुहार से एहसास अंकुरित हो ही जाते हैं...
    सुंदर रचना...
    बधाईयां...

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  15. kyun na chale eun kar lein..piro lein ahshash koshisosn ke dhagon se...behtarin..dheere dheere bahti is kavya nadi ke sath dheere dhere he chalne me maja aaya..sunder prastuti..sadar badhayee...mere blog par bhee aapks swagat hai

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  16. बहुत ही सुन्दर,,भाव अभिव्यक्ति है...

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