शुक्रवार, अक्तूबर 21, 2011

बस द्वारे ही है रौशनी की बारात


मिट्टी के कुछ ढेले दीयों के आकार में ढल रहे हैं
रोशनियों की बारात हमारे द्वारे खड़ी है
बहुत उमंगें हैं लक्ष्मी जी की मुँह दिखाई करने की मन में
त्योहारी तैयारियाँ थका रही हैं
लेकिन थकान को तो जैसे ठंडी होती जा रही रात की नर्म हवा
सहलाकर
नींद की गोद देकर
दूर छिटक कर
कहती है
अभी कुछ दिन और बाक़ी है
उस अमावस की रात को
जिस रात दीवाली की फुलझडियाँ
छिटकेंगी आंगन में
अलसाई हुई अंगडाईयां
नहीं नहीं
अभी नहीं
अभी तो इंतज़ार है
रौशनी की बारात का .........

16 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही खूबसूरत कविता।
    रोशनी की बारात का इंतज़ार जल्द ही खत्म होगा :)

    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. pahli baar aapke blog tak aana hua.
    sach hai laxmi ji muh dikhai ki bela kareeb hai.
    diwali ki hardik shubhkamnaein...

    उत्तर देंहटाएं
  3. Sounds interesting, might have to take you up on that some other time.

    Some people are too smart to be confined to the classroom walls! Here's a look at other famous school/college dropouts.
    Check out here for Smart People

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत आशावादी इंतज़ार ....सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  5. दिल की गहराईयों से बनी कविता .....छू गई इस मन को ....आभार
    संजय भास्कर
    आदत....मुस्कुराने की
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com/

    http://sanjaybhaskar.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  6. दीये के आकर में मिट्टी का ढ़लना कितना सुन्दर विम्ब है!

    उत्तर देंहटाएं
  7. रौशनी की बारात का सभी को इंतजार है।
    अच्छी कविता।

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर... हार्दिक शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत खूब.
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं..

    उत्तर देंहटाएं
  10. सोनरुपा जी क्षणिकाओं के वक़्त आपका परिचय ध्यान से नहीं देखा था ...
    वहां सिर्फ क्षणिकाओं को महत्त्व दिया मैंने कौन कितना बड़ा या छोटा है ये नहीं देखा मैंने
    पर आज जब डॉ उर्मिलेश जी का नाम पढ़ा तो लगा की इन्हें कहीं पढ़ा है शायद कर्नल वीरेंद्र प्रताप सिंह जी के काव्य संकलन ''रक्तांजलि''में उनकी लिखी भूमिका है ....
    आपमें साहित्य और संगीत एक साथ विद्दमान है तिस पर नम्रता भी ( ये इसलिए कह रही हूँ की क्षणिकाओं के चयन के वक़्त कइयों ने मुझे अपने कद की याद दिलाई ) दुआ है रब्ब आपको और हुनर दे ....ये रौशनी की बरात यूँ ही आपका घर आँगन रौशन करती रहे ....

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत अच्छी लगी आपकी यह अनुपम प्रस्तुति.
    सुन्दर भावों की अभिव्यक्ति भाव विभोर करती है.

    धनतेरस व दीपावली पर हार्दिक शुभकामनाएँ.

    मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत सुंदर !
    दीपावली पर आपको और परिवार को सस्नेह हार्दिक मंगल कामनाएं !

    उत्तर देंहटाएं
  13. aapki ashawaadi post ko padkar bahut achcha laga,may god bless u for ur wishes,aapko aur saare parivar ko deepawali ki dhero badhaiyan..tc

    उत्तर देंहटाएं
  14. सभी ब्लॉगर मित्रों को दीपावली की हार्दिक मंगलकामनाएं !

    उत्तर देंहटाएं
  15. आदरणीय हरकीरत जी,
    खूबसूरत सी दुआ जो आपने मेरे लिए की उसके लिए तहे दिल से शुक्रिया !

    प्रतिभाओं का आकाश इतना सम्रद्ध है कि उसमें मैं खुद को एक बूँद के भी समतुल्य नहीं मानती ! लेकिन सौभाग्यशाली हूँ कि हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध हस्ताक्षर डॉ.उर्मिलेश की पुत्री के रूप में मैंने जन्म लिया उनके कृतित्व जैसा एक अंश भी मेरी कलम से लिख जाये तो मैं स्वयं को धन्य सम्झूंगी ! आपने मेरी रचनाओं को सराहा उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं