गुरुवार, दिसंबर 08, 2011

आधी दुनिया की कुछ ज़िन्दगियाँ " जिन्हें सब कुछ स्वीकार है "

आधी दुनिया की कुछ ज़िन्दगियाँ " जिन्हें सब कुछ स्वीकार है "


25 नवम्बर को 'International day for the ellemination of violence against women 'से शरू होकर १० दिसंबर 'अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस ' की समाप्ति तक एक बार फिर हम '16 days of activism against gender violence' मना रहे हैं |सपष्ट है आधी दुनिया की कुछ  ज़िन्दगियाँ आज  भी ऐसे किसी भी दिवस के अर्थों से अंजान हैं |उनके लिए १६ दिन क्या १६ सदियाँ भी उनकी अस्तित्व को शून्य से शिखर नहीं दे पायीं |ऐसी ही कुछ ज़िन्दगियों  के नाम ......



कुछ काँच के टुकड़े 
हथेली में भीचें हुए हूँ मैं ,
बचपन से लेकर झुरियों तक  के सफ़र तक 
शायद,
अब  
मेरी लकीरें 
कट कट कर
जुड़ जाने की मजबूरियों को भी 
हौसलों का नाम देकर 
खुशफ़हम सी रहती  हैं |



19 टिप्‍पणियां:

  1. Epitome of women's inner strength; courage; sacrifice and the ability to live in hardest of the situation...yet smiling, not complaining....and still giving strength to herself til her last breath since childhood.... by seeing them happy for whom she dying.......and yet praying for their future in heaven.....MAJESTIC...!!!!!

    Without her we don't exist !!!!!!!!!!!!!!!

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  2. सटीक पंक्तियाँ समर्पित की है आपने!

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  3. मध्यम वर्ग में तो कुछ सुधार हुआ है पर नीचे तबकों में आज भी पिटने पिटाने को रोजमर्रा की ज़िदगी का एक अंश ही मानती हैं महिलाएँ।
    मेरी लकीरें...खुशफ़हम सी रहती हैं...बेहतरीन लगी ये पंक्तियाँ

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  4. आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ...........पहली ही पोस्ट दिल को छू गयी.......कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने..........बहुत खूब...........आज ही आपको फॉलो कर रहा हूँ ताकि आगे भी साथ बना रहे| ये जान कर ख़ुशी हुई की आप बदायूँ से हैं मेरा भी बहुत पुराना नाता है वहाँ से|

    कभी फुर्सत में हमारे ब्लॉग पर भी आयिए- (अरे हाँ भई, सन्डे को भी)

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    एक गुज़ारिश है ...... अगर आपको कोई ब्लॉग पसंद आया हो तो कृपया उसे फॉलो करके उत्साह बढ़ाये|

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  5. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।
    मेरा शौक
    मेरे पोस्ट में आपका इंतजार है,आज रिश्ता सब का पैसे से

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  6. इस पोस्ट के लिए धन्यवाद । मरे नए पोस्ट :साहिर लुधियानवी" पर आपका इंतजार रहेगा ।

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  7. aadhi duniya ; aadhi kya puri duniya
    sikhar par to wo hamesa rahi hai ..par kuch kaanch ke tukade hai jo bahno ki hatheli ki lakire kaat dete hai ...manu ki santano ko 2 hisson me baat dete hai

    sochne par majbur har insan jo is post par aaya ....tulsi ke grantho me kyu kaha taran hari

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  8. ज्यादा आज़ाद होने की चाहत ने कुछ अलग तरह की बेड़िया डाल दीं हैं पांवों में ...यह खुशफहमी ही तो है.... बदलाव शायद अब भी कोसों दूर है ...... गहन चिंतन लिए पंक्तियाँ

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  9. आपका पोस्ट पर आना बहुत ही अच्छा लगा मेरे नए पोस्ट "खुशवंत सिंह" पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  10. सुंदर पन्तियाँ बहुत अच्छी रचना,....
    मेरी नई पोस्ट की चंद लाइनें पेश है....
    सब कुछ जनता जान गई ,इनके कर्म उजागर है
    चुल्लू भर जनता के हिस्से,इनके हिस्से सागर है,
    छल का सूरज डूबेगा , नई रौशनी आयेगी
    अंधियारे बाटें है तुमने, जनता सबक सिखायेगी,



    पूरी रचना पढ़ने के लिए काव्यान्जलि मे click करे

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  11. जब भी आपके पोस्ट पर आया हूँ, हर समय कुछ न कुछ सीखने वाला चीज मिला है। यह पोस्ट अच्छा लगा । मेरे नए पोस्ट "खुशवंत सिंह" पर आपकी प्रतिक्रियायों की आतुरता से प्रतीक्षा रहेगी। धन्यवाद

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  12. गहरे जज्बात व्यक्त किये हैं आपने.
    आपकी भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए आभार.

    मुझे नई पुरानी हलचल पर आपका गीत सुनने का मौका मिला.
    कमाल का गायन है आपका.मैं तो अभिभूत हो गया.

    समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.
    आपके सुवचनों से मेरा मनोबल बढ़ता है,सोनरूपा जी.

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  13. कांच को भींचे हुए मुट्ठी में ... अद्भुत सोच ..

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