गुरुवार, अगस्त 30, 2012

ग़ज़ल

ग़ज़ल 

काग़ज पे घर बहुत से बनाये गए हैं आज 
 बेघर को सब्ज़  बाग़ दिखाए  गए हैं आज 

अख़बार की कतरन में चमकने के वास्ते 
बेबात के भी जश्न मनाये गये हैं आज 

मायूसियाँ कहीं इन्हें वीरान न कर जाएँ 
कुछ हसरतों के मेले लगाये गये हैं आज 

हर रात पूछता है बिस्तर मेरा मुझसे 
आँखों में कितने ख़्वाब सजाये गये हैं आज 


गुरुवार, अगस्त 23, 2012

सूना सूना है सावन तुम्हारे बिना


ये अंश हैं मेरे पिता डॉ.उर्मिलेश के १९९४ में प्रकाशित पहले संग्रह ‘धुँआ चीरते हुए’में से जिसमें  वे अपनी सृजन यात्रा के कुछ पल याद करते हुए लिखते हैं 


“मैंने पहली ग़ज़लअगस्त १९७१ में हिंदी के मौलिक ग़ज़लकार स्व.बलवीर सिंह रंग की ग़ज़ल ‘सूनी सूनी है होली तुम्हारे बिना /जिंदगी है ठिठोली तुम्हारे बिना ‘ से प्रभावित होकर लिखी थी (तब ग़ज़ल कहता था लिखता नहीं था ) मेरी पहली ग़ज़ल थी सूना सूना है सावन तुम्हारे बिना,अब ना लगता कहीं मन तुम्हारे बिना /मंदिरों में गया तो यही स्वर सुना, व्यर्थ जायेगा पूजन तुम्हारे बिना |उस  ग़ज़ल में नौ शेर थे सबमे हिंदी के तत्सम शब्दों का प्रयोग था | मेरी ग़ज़लों अगस्त ७१ से सन ७५ तक की ग़ज़लों में हिंदी के तत्सम शब्दों का आग्रह कुछ अधिक ही रहा |बाद की ग़ज़ल परिवेशगत यथार्थ को उद्घाटित करने वाली थीं उनकी भाषा ,बोलचाल की भाषा के बहुत नज़दीक होती गयी यह सब सायास नहीं हुआ | अत्यंत सहज और अनारोपित ढंग से यह बदलाब आता गया | सोच और भाषा दोनों ही स्तर मैंने बदलाब को आने दिया ,इसे बाधित नहीं होने दिया” “............................................................................
उसके बाद उनके ग़ज़ल,गीत-नवगीत,दोहा और भी अन्य विधाओं करीब २५ संग्रह प्रकाशित हुए हैं जो बहुत प्रसिद्ध हुए...........................................................................
एक १८ ,१९ साल के नवयुवक की ये पहली कोशिश जो बहुत सहज और भोली लगी मुझे,साथ एक पिता की पहली रचना होने के नाते और भी प्यारी
...................................................................
कुछ समय पहले पापा को याद करते हुए इसको संगीत में पिरोया था मैंने ...................................................................
आज पहली बार आप सब के साथ भी शेयर कर रही हूँ 

मंगलवार, अगस्त 14, 2012

शुभकामनायें

स्वतंत्रता दिवस की आप सभी को  बहुत बहुत शुभकामनायें 





भारत के अंग्रेजों से स्वतन्त्र होने की ६५ वीं वर्षगाँठ पर सब भारतवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें ...............

शीघ्र ही हम स्वयं भी तंत्र के साथ "स्व -तंत्र 'होने की वर्षगाँठ मनाएँ ...........

~ हिंद जय भारत ~