रविवार, जून 15, 2014

यादों का फलैश बैक

शायद पाँचवी क्लास की स्टूडेंट थी जब मुझसे क्लास में कहा गया कि ‘आपको एक ऐसा कार्ड बना कर लाना है जिससे हमें कोई अच्छी शिक्षा मिलती हो’!मुझ पर ज़्यादा आईडियाज़ तो नहीं थे , लेकिन ‘मेरा चार्ट सबसे सुंदर हो’ वाली सोच तो थी ! कुछ नहीं समझ में आया तो सोचा मम्मी से कहूँ,जब कि मुझे उन का उत्तर पता था ‘बेटा ख़ुद किया करो अपना काम’ |
इतने में पापा बोले ‘लाओ मैं बनाता हूँ’ मेरे लिए आश्चर्य था क्यों कि वक़्त की कमी की वजह से कभी-कभार ही ऐसा होता था कि पापा हमारा पढाई से रिलेटिड को बात किया करते थे , खैर मैं ख़ुश हो गयी पापा ने एक आर्ट पेपर माँगा उसको दो हिस्सों में मोड़ कर उन्होंने बस तीन पिलर बना दिये पहला सबसे ऊँचा, दूसरा उससे कम, तीसरा उससे भी कम फिर तीनों को अलग अलग रंगों से रंग दिया और तीनों पर लिख दिया ‘पहले देश ,फिर माँ फिर और कुछ”
मैं कुछ अनमनी सी हो गयी लेकिन उनको बिना जताए और बताए,उस कार्ड में मुझे कुछ भी बहुत सुंदर नहीं लगा मैंने सोचा 'ये कैसा कार्ड है जिसमे बस तीन लाइनें हैं',मैंने बुझे मन से अपने बैग में रख लिया !टीचर को दिखाया या नहीं ये तो याद नहीं! लेकिन जब धीरे धीरे बुद्धि ने थोड़ा विस्तार पा लिया तब महसूस हुआ कि इसमें कितनी गहरी बात थी |
आज जब शिंजन के साथ उनके होलीडे होमवर्क में हेल्प करने बैठी तो ये वाक़या याद आ गया, बिलकुल वैसा ही कार्ड शिंजन को बना के दिया है ,देखना है क्या रेस्पोंस मिलता है और मन भी है कि शिंजन के ज़रिये से अपने बचपन का फ्लैशबैक देख लूँ !
ज़िन्दगी में आगे भी न जाने कितने ऐसे ज़रियों से पापा ने हम तीनों भाई बहनों में संस्कार और दायित्व बोये !थैंक यू पापा फॉर एव्री थिंग्स |
आज आप का मुक्तक आपके लिए हम तीनों की तरफ़ से------------
नीम  होकर मिठास देते हैं
ख़ुद झुलस कर सुवास देते हैं
वो पिता ही हैं उम्र भर हमको
उत्तरोत्तर विकास देते हैं