शनिवार, दिसंबर 20, 2014

एक इमोशनल फ़ूल के कुछ मुश्किल पल और उसकी जकड़न

अगर मैंने दिवम पूछा-दिवम...आज आपके स्कूल में पाकिस्तान में पेशावर के आर्मी स्कूल में मारे जाने वाले बच्चों के लिए साइलेंस रखा गया था |तब मैंने ये नहीं कहा कि आपको मालूम है कि हमारे साइलेंस रखने पर या उन बच्चों के लिए संवेदना जताने पर कुछ लोगों का कहना है कि जब मुंबई में २६/११ का हमला हुआ तो क्या पाकिस्तानियों ने हमारे लिए संवेदना जताई थी जो हिन्दुस्तानी आँसू बहा रहे हैं और पाकिस्तानी भी इतने बदसूरत मंज़र के बात भी नहीं चेते हैं |

मुझे मालूम है एक बच्चा संवेदनायें दिल से महसूस करता है भले ही ‘संवेदना’ शब्द उस बच्चे के लिए समझना सबसे कठिन हो |

अगर बच्चों ने पूछा...मम्मा संसद किसे कहते हैं ? मैंने संसद के बारे में समझाते हुए ये बिलकुल नहीं बताया कि हमारे रीप्रिसेंटेटिव यहाँ हाथापाई भी करते हैं,गाली देते हैं कुर्सियां फेंकते हैं |

अगर कभी मैं बच्चों से धर्म के बारे में बात करूँगी तो यही कहूँगी कि तुम इंसानियत को अपना धर्म मानना लेकिन बचूँगी ये बताने से ‘कि जिस देश में तुम रहते हो वहाँ धर्म में अंधभक्ति सिखाई जाती है,सबसे ज़्यादा फ़साद धर्म की वजह से होते हैं,धर्म सबसे ज़्यादा लचीली चीज़ है जिसे जो चाहे अपने मतलब के लिए उसकी बुनियादें कमज़ोर कर सकता है’|

अगर उन्हें पैसे की क़ीमत समझाने के लिए एक झोपड़ी में फटे कपड़ों में खेलते बच्चों की तकलीफ़ें गिनवाउंगी तो मैं ये नहीं बताऊंगी कि इन्हें ग़रीब बनाये रखने के भी लोगों को क्या-क्या फ़ायदे हैं | 
  
अगर शिंजन की ज़िद है मम्मा ये रेड शाइनिंग वाले एप्पल लो न ? तो मैं ये कहूँगी..नहीं बेटा,ये वैक्स लगे हुए एप्पल हैं ये हेल्थ के लिए अच्छे नहीं हैं |लेकिन ये वैक्स लगे हुए क्यों हैं ?मैं ये शायद नहीं बताउंगी |

रोज़ाना ज़िन्दगी अक्सर ऐसे पॉज़ देती है जहाँ बिखरने के बाद संभलने का मौक़ा भी मिल ही जाता है |
अपने बच्चों का सुरक्षित और सुंदर दुनिया में बड़ा करने का ख़्वाब अब पूरी तरह टूटने लगा है | अब उन्हें कुछ बताने पर कुछ छुपा लेना बहुत ज़रूरी लगता है | अक्सर एक कहानी दोनों को सुनाती हूँ जिसमें मैं उन्हें एक चिड़िया के बच्चों का क़िरदार देती हूँ और वो मानते हैं कि वो एक चिड़िया के छोटे बच्चे हैं जिन्हें अभी पूरी तरह उड़ना नहीं आता,उनकी माँ उन्हें उड़ना सिखायेगी ,बचना सिखायेगी |लेकिन मुझे एक फ़िक्र है कि उनके लिए मेरा  ख़ुद का बनाया सुरक्षित घेरा उन्हें मजबूत नहीं होने देगा ,मैं सोचती थी बच्चों के दिल और मन की तरह उनकी दुनिया भी ख़ूबसूरत होनी चाहिए इसीलिए उनको सिक्के के दोनों पहलू दिखलाना बहुत मुश्किल लगता है |लेकिन दिखलाना तो है क्यों कि चिड़िया के ये छोटे बच्चे अब बड़े हो रहे हैं |

सबसे आसान अब ये लगता है कि एक ख़्वाब देखूँ जिसमें पूरी दुनिया को इरेज़र से मिटा कर एक नई दुनिया बसा लूँ .......बहुत अच्छी सी दुनिया जहाँ हम सब अपने अपने वक़्त को ख़ूबसूरती से जी पायें |


__________________________एक 'इमोशनल फ़ूल' के कुछ मुश्किल पल और उसकी जकड़न !!

 




3 टिप्‍पणियां:

  1. इसको कहते हैं अपने विचारो और भावनाओं को शब्दों का रूप देना..आई होप दिवमं शिंजन आपके दिए हुए संस्कारों के दायरे में हमेशा महफूज़ रहेंगे..

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  2. आपके ख़्वाबों की दुनिया भी सच होगी जिसमे आप अपना वक़्त अपने हिसाब से बिताएंगी,बिना किसी जकड़न के,पूरी आज़ादी के साथ..😊

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  3. सही कहा.. वैसे दुनिया क्या करती है वो तो वे बड़े होकर ख़ुद समझ जाएँगे। हाँ पर जो आप सही समझती हैं वो जरूर बताएँ क्यूँकि भविष्य में किसी विषय पर अपनी राय बनाने के पहले वे ये जरूर सोचेंगे कि माँ ऐसा कहा करती थी,,

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