सोमवार, जनवरी 26, 2015

बाँटना ही है तो थोड़े फूल बाँटिये

आप देश में फैली कुरीतियों पर बड़ी आसानी से वक्तव्य दे सकते हैं, क़ाग़ज़ भर सकते हैं।आपका बुद्धि जीवी होना ख़तरे में पड़ जायेगा यदि आप अपने अन्वेषी नज़रिये से अच्छाई में भी बुरे से बुरा न खोज पाये तो| 
भ्रष्टाचार,बेरोज़गारी,आतंकवा,ग़रीबी,अशिक्षा,नारी अस्मिता,शोषित वर्ग की अधिकारों के प्रति अज्ञानता,अलगाववाद न जाने कितने कोढ़ हैं भारत के शरीर पर जिन का होना पल-पल हमें शर्मिंदा करता है| लेकिन क्या हमारा विशाल गणत्रंत,भारतीय संस्कार,मूल्य,वैज्ञानिक प्रगति,ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक समृद्धता ,विविध धर्म, विविध ढंग,विविध संस्कृति,सैन्य सम्पदा,औद्योगिक क्षमता,आधुनिक प्रगति,अन्न सम्पदा,वैदिक खज़ाना हमारे लिए अपने देश पर गर्व करने के कारण नहीं हैं?

अगर सिर्फ़ हमेशा ही नकारात्मक पहलूओं को ही दोहराया जाता रहे तो आप कितने सकारात्मक क्षणों और उनसे मिलने वाले सुकून को खो रहे हैं इसका आप को शायद ही भान हो|लेकिन ज़रा उन सैनिकों से पूछिए जिनके लिए उनका देश ही उनके लिए सब कुछ है उनसे अपने देश के लिए उनकी भावना पूछिए और फ़िर उनका  गर्वोन्मत सीना देखिये ।ज़रा सोचिये वो भी आपके नकारात्मक रिमार्क्स का पुलिंदा खोल के बैठ जाएँ तो कहाँ से लायेंगे वो जोश,ज़ज़्बा,प्रेरणा जिसकी बदौलत वो सरहद पर हमारी रक्षा के लिए कटिबद्द हैं। कल परेड में शामिल जल,थल,नभ सेना में शामिल स्त्री सेनानियों से पूछिए वो बतायेंगी कि उनकी कोमलता उनके देश के लिए उनकी जीवटता है ,बच्चों से पूछिये अपने देश का मतलब तो वो बड़ी मासूमियत से अपनी तोतली भाषा में देश के लिए सिर्फ़ प्यार और अपनापन जाहिर करेंगे ।

कल गणत्रंत दिवस था लेकिन आप का प्रलाप ज़ारी था,अरे...आप भारत के लिए ही ख़ुश हो लेते वो तो निरपराध है |जिन शहीदों,राज नेताओं,स्वतंत्रता सेनानियों,संविधान निर्माताओं के अथक संघर्षों के कारण हमें ये उत्सव मनाने का मौक़ा मिला,ख़ुशी ख़ुशी मना लेते|

यूँ भी परेशां होने कई वजह बड़ी आसानी से मिल जाती हैं खुश होने की ढूंढनी पढ़ती हैं। कभी कभी नए विचार नई समझ कुछ भी शाश्वत,निश्चित,सार्वभौमिक नहीं रहने देती लेकिन ये भी ज़रूरी है कि हर होने को समकालीन द्रष्टि भी चाहिए |

आज संचार क्रांति के दौर में जीना कई मायनों में उपलब्धि है तो कई मायनों में असंख्यों विचारों,मान्यताओं,जानकारियों का जाल भी है|जब ज़्यादा विचार आप तक पहुँचने लगें तो कभी कभी विचार शून्यता की स्तिथि पैदा हो जाती है | ऐसा कल कुछ मेरे साथ हुआ | परसों ही सोच लिया था कि गणतंत्र दिवस को आज उसी अंदाज़ में मनाया जाये जिस अंदाज़ में बचपन में मनाया करते थे |लेकिन गणत्रंत दिवस पर बहुत सी नकारात्मक बातों,विचारों,फ़िज़ूल की चर्चाओं को सोशल साइट्स पर पढ़कर मन खिन्न हो गया |

कभी कभी लगता है बुद्धि के माध्यम से आदमी सिर्फ़ सच के पहले दरवाज़े तक पहुँच पाता है लेकिन सच्चाई को पा लेने के लिए ह्रदय का रास्ता चाहिए जो बड़ा सुकोमल है|

ऐसे ही कुछ अवसर,रिश्ते,पल,यादें,उत्सव दिल से महसूस किये जाने चाहिए |
हर वक़्त क्यों इतना प्रलाप,विषाद ?

हौसला दीजिये,हौसला रखिये,ख़ुद एक क़दम बढ़ाइए,निराकरण बाँटिये,निराकरण कीजिये, सच्चाई को आवाज़ दीजिये सच्चाई की आवाज़ बनिए |आपके प्रलाप के कारण तब तो कुछ दूर हों वरना यूँ ही लिखने,बोलने से चर्चाओं से आप अपने आस-पास मानसिक तनाव,उद्वेग,उत्तेजना बढ़ाने में हाथ बंटा रहे हैं |  



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