शनिवार, जून 18, 2016

पल पल दिल के पास

'आंवला' हमारे यहाँ से 24 किलोमीटर दूर, हमारी बुआ जी का घर ! ऐसे ही तपन भरे दिन और उनके घर तक का रास्ता,और रास्ते में जामुन के ख़ूब सारे पेड़ और एक ज़िद उन पेड़ों के रखवाले से कि 'भैया हमसे पैसे ले लो लेकिन हमें अपने हाथों से जामुन तोड़ने दो '!

ऐसे ही हमारे घर के पास एक मस्जिद उसके पास लगे खट मिट्ठू दोस्त यानि आड़ू, शहतूत और इमली का एक-एक पेड़ और एक इंतज़ार 'कि कब ये पकें और कब हम खाएं'!

ऐसे ही बरेली के रास्ते पीले-पीले फूलों से संवरे कुछ पेड़ और एक चाह 'कि इनके साथ मुझे फ़ोटो क्लिक करवाना है ,मेरे सफ़ेद आउटफिट के साथ ये पीले फूल कितने अच्छे लग रहे हैं,इसका डी पी बहुत प्यारा लगेगा !

और आज घर से दिल्ली तक का सफ़र,घनी धूप में सड़क के दोनों ओर नारंगी छतरी से तने गुलमोहर के ख़ूबसूरत पेड़ और एक ख़ुशी' कि उफ़्फ़ कितने सुंदर'!

लेकिन फिर डर और फ़िक़्र कि ये भी कहाँ ज़्यादा दिन रहेंगे कि जैसे जामुन,पीले फूलों वाले पेड़,मेरे आड़ू,शहतूत और इमली के पेड़ काट डाले गए हमारी भौतिक सहूलियतों के लिए ! और यूँ भी मानसिक सहूलियतों की टूट फूट की मरम्मत के लिए हमारा मन ही कारीगर है !

अब वक़्त सुख को चिंता के साथ महसूस करने का है कि 'न जाने कब तक साथ रहें ये पल, ये नज़ारे'!
और
थोड़ा सा फ़िल्मी हो जाने का भी है'हर पल यहाँ जी भर जियो,जो है समां कल हो न हो'!

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें